मौसी हैं। सहायक प्रोफेसर सह शोध निर्देशक हैं। कहाँ हैं नहीं बताएंगे, नहीं त सब दलाली कराने लगेगा ! बनारस आयी हुईं हैं, ससुराल है उनका। कल से खूब फ़ोटो भेज रही हैं। छठ है। छठ साल में दो बार होता है, चैत्र में और कार्तिक में। हमारे यहाँ चैत्र वाला होता है, चैत्र के खरना के दिन हीं जी नाना का जन्म है इसीलिये। आज हमलोग फ्री हैं। भोरे से ही खखुआ रहे थे कि परसादी खाने जाना है.. चाँप के खाएंगे। आज गुड़ का खीर बनाया जाता है, चक्की में आटा पीस कर उसकी रोटियाँ बनाई जाती हैं। उसका भोग लगता है फिर सारे जानने-पहचानने वाले लोग आकर प्रसाद खाते हैं।
कल रात में 'राजनीति' देख रहे थे, कटरीना कैफ वाला। देर से सोए, देर से उठे। तो नहीं नहाए कि डायरेक्ट सांझ को नहा कर परसादी खाने चल देंगे। साँझ के निकल गए दोस्त-यार साथे की उधर से घूम-घाम कर आएंगे त जाएंगे परसादी खाने.. लीजिये ! गाँजा पीने के बाद सबको लगा भूख, न नहाया न धोया हुए से उठा आ चल दिया भर जहानाबाद में परसादी खींचने। हमहुँ मोटरसाइकिल पर बैठे-बैठे सात-आठ घर देख गए। नाना तब तक फोन कर दिए -
"अरे जल्दी आइये, नहाइये, जाइये.. हमको भी निकलना है प्रसाद खाने.."
"हाँ त चले जाइये न, नानी माँ हैं न घर पर ?"
"नहीं उ चली गयी हैं संजीवबा हीं, उसकी माय भी न छठ कर रही हैं !"
"हाँ त हम भी निकले हुए हैं परसादीये खाने.. आप चाभी लेते जाइये आते समय हम फ़ोन करके पूछ लेंगे की कहाँ हैं !?"
"अरे चांडाल, नहाया है तुम रे ? हरामी कै कटिंग के होता है ? आगे नाथ न पीछे पगहा ! अपने तो करम-धरम करना नहीं है, जे कर रहा है ओकरो चल गया हगली-गाँड़े नास में मिलाबे। टंगड़ी काट देंगे, लौटो नहीं तो।"
"दोस्त लोग साथे थे, देर हो गया। जेतना देर में घरे लौट कर नहाते ओतना में सोंचे खा लेते हैं।"
"साला भर जहानाबाद का जेतना चोर-चोट्टा लइकन है सब तुम्हारे मित्र है। एतना रात तक कहाँ गोल मेज़ कॉन्फेंस कर रहा था ? लौटता है कि नहीं ?"
लीजिये। खाइये क्या खाइएगा.. जेतना के बोक्का न, ओतना के जब्बह कराई ! आधा घंटा से घरही बइठल हैं। अभी नानी बुरा-भला कह रही है, कुछ देर में आएंगे तो श्रीमान कहेंगे। नहीं नहाने पर आज ढेर कार्यक्रम होने वाला है। पूरा मोहल्ला का मनोरंजन होगा। तब तक हम करोड़पति देख लेते हैं, सहवाग आया हुआ है। हा हा हा ..
- मोहित / 01.11.19
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