Thursday, October 31, 2019

पटेल जयंती

कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद के साथ-साथ पाँच सौ बासठ रियासतों को भारत में विलय करने वाले, और गाँधी की हत्या के बाद संघ में मिठाई बाँटवाने के बाद संघ पर पाबंदी लगवाने वाले सरदार पटेल को एक सौ चौवालीसवीं जन्मदिन पर सादर नमन।
हालाँकि ये दूसरी बात है कि, तीन हज़ार करोड़ की लागत से उत्पन्न परियोजना में जिसमें रोजगार और पर्यटन का हवाला दिया गया था, पछत्तर हज़ार लोग बेघर कर दिए गये और उनके लिए बाद में क्या किया गया कोई नहीं जानता। पिछले साल इक्कतीस अक्टूबर को इन लोगों ने बहुसंख्यक रूप से विरोध किया था जिसके बारे में कोई नहीं जानता। मोदी 'जी' ने इनके राष्ट्रीय एकीकरण को अपने GST वाले 'एक राष्ट्र, एक टैक्स' से जोड़ा था। हालांकि उन्होंने कभी खुद को पटेल नहीं कहा।
खैर, गाँधी के इस सिपाही ने न कभी तो प्रधानमंत्री बनने की इक्षा जताई, न ही काँग्रेस का अध्यक्ष बनने की। लेकिन इस बात को भाजपा और काँग्रेस सदियों तक अपनी-अपनी राजनीतिक चूक का हवाला देते रहेंगे। पटेल प्रधानमंत्री होते तो ऐसा होता, पटेल अध्यक्ष होते तो वैसा होता। पटेल होते तो कश्मीर होती, नेहरू ने उसे बेंच दिया।
अब मुझे दो अक्टूबर वाले उन समाजवादी कार्यकर्ताओं का वीडियो याद आ रहा है जो उन्होंने उनकी प्रतिमा के नीचे खड़े होकर बनाई थी। मैं भी तीन हज़ार करोड़ का प्रत्यक्षदर्शी बनूँगा तो वैसा स्टंट करने से पीछे न रहूँगा ! :D

- पटेल साहब को पुनः प्रणाम। अखण्ड भारत के संस्थापक कहा जाए इन्हें तो गलत नहीं होगा।

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