Monday, February 3, 2020

पटना कब लौटोगे ?


पटना से पार्टनर आउ अशुतोष का फ़ोन आया था। जहानाबाद लौटने की बबात पूछ रहा था। जब फ़ोन करता है पटना आने के लिए कहता है। बुलावे में 'आग्रह' की मात्रा इतनी अधिक कि अगर आपका बस चले तो आप अपने मंडप से उठ कर पटना भाग जाएं। कभी-कभी हमको खुद लगने लगता है कि दुनिया को इस सलीके से बनाना चाहिए था कि दुनिया का हर शहर पटना के पचास किलोमीटर के दायरे में हो.. जूता के फीता बाँधते हुए जावा के चाभी उठाये आउ भाग गए पटना। पीछे से नाना "एतना भोरे-भोरे, कहाँ जी ?" करते रहें.. अब जब तक पटना के बेली रोड के पीला बत्ती में अस्सी-सौ के स्पीड पर जावा नहीं रगेदायेगा तब तक स्साला देह चुनचुनाते रहेगा। एक हाथ से एक्सलेटर ऐंठते आउ एक हाथ शानदार वैन ह्यूसेन के जैकेट में.. भर मुँह मगहिया पान भी। बिना हेलमेट के.. रंगदार टाइप, एक-दो बजे रात में !
जाड़ा सबसे पसंदीदा मौसम रहा है, दिसंबर या जनवरी की रात, पुनाईचक स्थित अपने किराए के मकान में फ़र वाला कम्बल में घुस कर ताश खेलना।
पटना रहते थे त नानी माँ को कह दिए थे कि जी नाना अगर घर से पटना जाने के लिए निकलें तो हमको एकदम बता दिया कीजिये। भोरे-भोरे फ़ोन आ गया त ओहि माघ के भोर में फेनाइल डाल कर रूम पोछा रहा है.. लइकन के सात बजे उठा-उठा कर अपने-अपने होस्टल भगाया जा रहा है.. मार रूम फ्रेशनर के पूरा रूम महका दिया गया है। रूम इतना सुंदर और स्वच्छ लग रहा है कि जैसे नयकी भौजी आ रही हैं, बिछावन पर गुलाब का पंखुड़ी रख दीजिए तो बिहअउती से कम नहीं लगेगा। कहीं से कोई सुराख नहीं छोड़ा गया है, माचिस का तीली भी फेंका गया है तो दूसरा गली के नली में। हाथ ठिठुर गया है, किताब-कॉपी खोल कर बैठे रहिए.. कभी भी महामहिम उधर से चूड़ा, गुड़ आउ तिलकुट लेकर आ रहे होंगे। एतना के भी में नाना आएंगे त कहीं न कहीं से देख कर कह ही देंगे कि
"खिड़की पर तो झोल लगा हुआ है, साफ-सफाई रखना चाहिए। नहाए केतना दिन हुआ है ?"
"कल ही नहाए थे, अब सकरात में नहा लेंगे। आप लोड नहीं लीजिये।"
"बोक्का नीयर गमक रहा दूरे से.. नहाओ तो पहिले तुम आज !"
"ए जी नाना माथा नहीं भुकाइये। अलगे क्रांति लेकर आते हैं आप!"
"लाज-सरम सब बेंच कर सोमपापड़ी खा गए हो जी ? जे विद्यार्थी नहायेगा नहीं से पढ़ेगा का ? हमनी लइकन नहीं थे ? भोरे-भोरे नहा कर ठाकुर जी के घंटी बजा आते थे, दीन-धरम सब भुला गया है।"
पानी एकअछिया चूल्हा पर चढ़ा दिया गया है। कोतवाली थाना में लिख कर दे दीजिए कि आपका शोषण हो रहा है, लेकिन फिर मोना सिनेमा हॉल में सत्तर एमएम के पर्दा कर कटरीना कैफ को नाचते देखने के लिए पैसा कौन देगा ? सोंच लीजिये.. :|

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