Wednesday, September 4, 2019

जावा बयालीस

कल गए पटना, पिछला साल के नवंबर से ही जाल बाँध रहे थे - हमारा घर वैसा नहीं है कि - "मोटरसाइकिल ले दीजिए नहीं त नदी में कूद जाएंगे !"

ऐसा कहेंगे त नाना खुद उठा कर भोरे भोरे सुतला में नदी में परवह कर देंगे !

"न पढ़े के न लिखे के, जे लइका एक लाख के मोटरसाइकिल चढ़ेगा उ का पढ़ेगा ? हमनी लइकन नहीं थे ? तीन कोस पैदल जाते थे पढ़े ! तीन कोस समझता है रे तुम ?"
"किलोमीटर में बताइए, हमको कोस आ भोंस नहीं बुझाता है !"
"ई देखिए नबाबी ! वाह बेटा, बढ़िया पढ़ाई पढ़ा तब तो.. तीन कोस में छौ मील माने नौ किलोमीटर !"
"बस त वही नौ किलोमीटर हम जावा से जाएंगे ! अट्ठारह सावन भादो देख लिए अब कहिया चढ़ेंगे गाड़ी पर ? दोसरे के गाड़ी में पेट्रोल भरवाते दिन जाएगा ?"
"गाँड़ में गुह न माई रे हग्गम ! एक पईसा का रोजी नहीं है आउ सौख की जावे पर चढ़ेंगे ! जहिया कमाना तहिया अपना हेलीकॉप्टर किन लेना हमको उससे मतलब नहीं है ! साईकल से जो जहाँ जाना है !"
"हम ओतना नहीं जानते हैं.. इंटर के बाद साईकल से चले वाला लइकन मउगा कहलाता है ! हमको जावा बुक कर दीजिए नहीं त आज से इस घर में खाना त्यगते हैं हम !"
"इसको आज से खाना बंद करो.. देखते हैं कहाँ से जुड़ेगा इसको !"

मास्टर के घर में पैदा होना अपने आप में एक त्रासदी है.. बात नहीं बना ! मामा से बोले, मामा बढ़िया आदमी है - हमको तब ये ख्याल आया कि अच्छा आदमी बनने के लिए शिक्षक न होना अति आवश्यक है ! ममामा बोला कि हम देते हैं पैसा.. जाकर बुक करलो ! किसी से पाँच हज़ार व्यवस्था करो बाकी जब डिलीवरी होगा उसका पैसा हम देंगे !

मौसी-नानी-मम्मी का एक्के मत रहा !

"अरे गिर जाएगा, एक्सीडेंट हो जाएगा त का करेंगे हम !? अभी मोटरसाइकिल चलाने का उमर है ? नाना बहत्तर में नौकरी शुरू किए त अस्सी में राजदूत किनाया था - न नौकरी न चाकरी तेल कहाँ से भरवाओगे ?"

औरतों का घर में होना त्रासदी का क्यूब है। कोई नई चीज़ लेने से पहले इनकी राय एकदम न लें काहे से की ये सिर्फ़ राय देंगी.. पैसा नहीं ! रोहित सरदाना राय देगा, लेकिन मकबूज़ा कश्मीर में जाकर आतंकवाद पर रोक लगाने के लिए कुछ नहीं करेगा ! खैर, यहाँ भी बात नहीं बना..

फिर ढेर जाल बाँधे अंततः नाना पैसा दिए, जावा कल बुक हो गया है ! आपसे विनम्र आग्रह है कि इसपर नज़र न लगाएं अथवा आप अपनी मौत के खुद ज़िम्मेदार होंगे ! 😑

- जय हिंद / जय जावा ❤️

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